aadarsh

सच का सफर

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कहां तुम चले गए....

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जिंदगी की दौड़ भी आज धीमी हो गई
तुम्हारी महक न जाने कहां खो गई
गम की धूप में नहीं दिख रही कोई छांव
नम हवाओं में और नमी हो गई
वो हवा का झोका……
वो मुस्कान, वो अंदाज
सच को हंसकर बोलना
धीमे अंदाज में बड़ी बात बोलना
शायद अब खो गया
आज माहौल गमगीन हो गया
सभी आज शांत हैं …. क्या बात हो गई?
जो कभी सितारों की तरह चमकता था
वो आज सितारों का ही हो गया
शब्दों में नहीं कह सकता ……….कि
मेरा ….बाबू मोशाय…..सो गया ।।

अच्छा तो हम चलते हैं...

अच्छा तो हम चलते हैं...

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3 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

bdsingh के द्वारा
October 20, 2013

एक अच्छी रचना।

dineshaastik के द्वारा
August 2, 2012

राहुल जी ऐसे लोग मरते कहाँ हैं, यह तो हमारे दिलों में जीवित रहते हैं।

    RAHUL YADAV के द्वारा
    August 2, 2012

    नमस्कार दिनेश सर…. ठीक कह रहें हैं आप पर साक्षात कमी तो महसूस ही होती है।


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