aadarsh

सच का सफर

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आरूषि का खत.......माँ के नाम

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माँ…….तुम कैसी हो…? मै तो अब इस दुनिया में नहीं कि तुम्हारा ख्याल रख सकूं………पर एक बात मै हमेशा ही सोचती हूं कि ……..पापा चुप हैं…..पर तुम तो माँ हो …..माँ तो अपने बच्चों के लिए सब कुछ न्योछावर करती है फिर ये खामोशी कैसी……….? माँ मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं…….क्योंकि जिसने जन्म दिया उससे कोई शिकवा कैसे हो सकती है……पर आज दुनिया माँ-बेटी के रिश्तों पर उँगली उठा रही है……आज सिर्फ यह एक परिवार की बात नहीं रह गई है…..बात तुम्हारी बेटी की इज्जत से जुड़ गई है…….और तुम चुप हो……? मुझे मरने का कोई दुःख नहीं है माँ……दुःख तो आपके चुप रहने का है…….हिम्मत करो माँ…और…सच दुनिया को बता दो….। एक सच को छिपाने में सौ झूठ का साथ मत दो माँ …..नही तो तुम्हारी बेटी को कभी शांति नहीं मिलेगी…..और अब यह सिर्फ तुम्हारे हाथ में है कि जिस बेटी के लिए तुम अपनी कई रातें न्योछावर करती थी….उसी की इज्जत का मोल आज मेरे जाने के बाद कुछ नही रहा……दुःख होता है माँ…अब भी देर नही हुई है माँ…..दुनिया को सब सच बता दो।
तुम्हारी बेटी
आरूषि

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11 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

mayankkumar के द्वारा
June 20, 2012

वाह .. राहुल जी आपकी रचना को सलाम करता हु …… कहना पड़ेगा की .. आप कितने भी बदल जाएँ पर आपकी अभिव्यक्ति का नज़रिया नहीं बदल सकता …. आप भविष्य में एक जुग्हरू पत्रकार कके रूप में ख्याति प्राप्त करें ऐसी हमारी शुभ कामनाएं हैं !!!!

    RAHUL YADAV के द्वारा
    June 21, 2012

    मयंक भाई आपने तो …….बस प्रोत्साहन के लिए धन्यवाद

dineshaastik के द्वारा
June 2, 2012

राहुल जी नमस्कार, ऐसा लगता है कि यह पत्र सचमुच  ही आरुषि का हो।

    RAHUL YADAV के द्वारा
    June 3, 2012

    धन्यवाद सर…

चन्दन राय के द्वारा
May 30, 2012

राहुल मित्र , आपकी पत्र में आरुशी की आत्मा से निकल रही करुनामय आवाज है , सायद इसे पढ़ पत्थर दिल माँ बाप का मन पिघल सके

    RAHUL YADAV के द्वारा
    May 30, 2012

    चन्दन भाई नमस्कार……… अगर ये अनहोनी हो जाए तो फिर इस रहस्य से पर्दा स्वतः उठ जाएगा और एक लड़की की सरेआम हो रही बदनामी भी शायद इससे रूक सके।…….

nishamittal के द्वारा
May 29, 2012

आपके पत्र के माध्यम से सही प्रश्न उठाये हैं आरुशी ने राहुल जी.

    RAHUL YADAV के द्वारा
    May 29, 2012

    आज हमारा समाज बिना तथ्य के ही कयास लगाता है…..और बात जब किसी की इज्जत की हो …..तो ऐसे कयासो से समाज को बचना चाहिए।……….संदेश देने के लिए आपका धन्यवाद

sinsera के द्वारा
May 25, 2012

rahul ji , नमस्कार, आप ने बहुत सटीक बात कही,जिस तथाकथित इज्ज़त को बचाने के लिए आरुषि को जान गंवानी पड़ी, आज वही इज्ज़त उसके माँ बाप की चुप्पी की वजह से सरेबाजार उछल रही है…इतने तमाशे के बाद अब तो उन लोगो को सच बोलना ही चाहिए..

    RAHUL YADAV के द्वारा
    May 25, 2012

    नमस्ते जी….. आपने बिल्कुल सही मूल्यांकन किया………..धन्यवाद भागीदारी के लिएं

RAHUL YADAV के द्वारा
May 28, 2012

मयंक जी आपको सादर नमस्कार आपका दर्शन हुआ मै धन्य हो गया।


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