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सच का सफर

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बापू उदास हैं ( कविता )

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अगर आज हमारे बीच महात्मा गाँधी( बापू ) होतें तो क्या वह आज जो हो रहा है यह देखकर खुश होते? शायद जवाब होगा नहीं। इसी को ध्यान में रखते मै बंदर बापू का एक कविता पेश कर रहा हूँ।
……. इक्कीसवीं सदी का दौर है
हर किसी को आस है……..
पर आपको है पता
बापू उदास हैं…..
अहिंसा कहां गई
सत्य भी है खो गया….
कोयले की खान में
सब काला हो गया….
बची नहीं उम्मीद है
न अब विश्वास है
देखकर हमंे-तुम्हें
बापू उदास हैं……
बापू के बंदरों ने भी
छोड़ दी बापू-गिरि
अब क्या है बचा….
सब खत्म हो गया…
सम्मान तो है आपका ( बापू का )
पर कम नहीं उपहास है
देखकर यह कह रहा मैं
बापू उदास हैं…
महान बनने की चाह है ( हम सभी को )
इंसान तो है सो गया
मेरे बापू का सपना तो
सपनों मे ही खो गया…
हत्या है…..बालात्कार है
बंद करते एक-दूसरे की सास हैं
रो रही है आत्मा…………क्योंकि
बापू उदास हैं……..।

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10 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

ashishgonda के द्वारा
July 13, 2012

मान्यवर! वाकई बापू उदास है…………. बहुत खूब

    RAHUL YADAV के द्वारा
    August 1, 2012

    आशीष भाई आपका साथ मिला धन्यवाद

mayankkumar के द्वारा
May 28, 2012

वाह राहुल जी आपने तो सत्य और अहिंसा की अलख ऐक बार फिर से पाठकों के ज़हन में जला दी। सधन्यवाद ! आपकी रचनाओं ने हमेशा कोई ना कोई सीख दी है। मैं आपका तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। !!!1

    RAHUL YADAV के द्वारा
    May 29, 2012

    मयंक जी नमस्कार…. अच्छे व्यक्ति की ये निशानियां होती हैं कि वह सदा दूसरो को आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता रहता है जिसकी यह निशानी है कि आपने इतना प्रेरक कमेंट दिया है। मयंक जी आपका आभार

चन्दन राय के द्वारा
May 10, 2012

राहुल मित्र , बापू उदास हैं……..। बहुत ही उत्कृष्ट कविता , मेरे द्वारा आपको कुछ भी कह पाना छोटा ही होगा , आपकी सोच , कलम को मेरा सलाम

    RAHUL YADAV के द्वारा
    May 10, 2012

    चन्दन भाई आपके बड़प्पन को सलाम…..धन्यवाद उत्साह बढ़ाने के लिये

ajaydubeydeoria के द्वारा
May 9, 2012

राहुल जी नमस्कार. वास्तव में वर्तमान को देखते हुए बापू उदास है. सुन्दर प्रस्तुति…. बधाई…..

    RAHUL YADAV के द्वारा
    May 9, 2012

    धन्यवाद सर

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
May 8, 2012

राहुल यादव जी सादर- वर्त्तमान परिवेश से महात्मा गाँधी का बहुत ही सुन्दर व सटीक तुल्नात्मल विश्लेषण किया है तुमने अपनी कविता के माध्यम से. शावाश राहुल जी तुम बहुत आगे जाओगे. लगातार लिखते रहो. मुझे पसंद आई तुम्हारी कविता. सुन्दर……………….अति सुन्दर…………………….. मेरे ब्लॉग पर भी तुम्हारा स्वागत है………………….. http://www.hnif.jagranjunction.com

    RAHUL YADAV के द्वारा
    May 8, 2012

    सर आपका शुक्रिया


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