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हमका कोई बतावै भैया - (कविता)

Posted On: 28 Apr, 2012 Others में

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हमका कोई बतावै भैया
ई कईसन बात है………….
जब जाबो इस गहराई मा
जनबो….. ई का बात है…
आके कोई बतावै भैया
काहे भागमभाग है………
सब तो पहिनत कपड़ा हैं….और
सब खाना खात हैं…..
फिर काहे का खून-खराबा
ये तो गड़बड़ बात है……..
हमका कोई बतावै भैया
ई कईसन बात है ?
हमका भाए गुड़-रोटी…….और
काहे की प्यास है ?
जीवन चले दा हल…..के……लेखा (हल की तरह)
सब हरियाली बन जात है
प्यार की भाषा सबसे मीठी
फिर काहे मतभेद हो
हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई
हम सब मिलकर एक हों
मंदिर-मस्जिद इक भगवान
फिर काहे का भेद हो
प्यार की भाषा हम सब बोलें
न कोई मतभेद हो ।

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14 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yogi sarswat के द्वारा
May 3, 2012

प्यार की भाषा सबसे मीठी फिर काहे मतभेद हो हिन्दू-मुस्लिम-सिख-ईसाई हम सब मिलकर एक हों मंदिर-मस्जिद इक भगवान फिर काहे का भेद हो प्यार की भाषा हम सब बो सद्भावना जगाती, एक अच्छी कविता ! बढ़िया लेखन

    RAHUL YADAV के द्वारा
    May 3, 2012

    धन्यवाद आपका सर।

prashantsingh के द्वारा
May 2, 2012

आज बहुत दिनों बाद एक युवा के द्वारा रची गयी कविता पढ़ कर अच्चा लगा |

    RAHUL YADAV के द्वारा
    May 3, 2012

    आप लोगों के सहयोग से ही तो लिखने का मन करता है।

mayankkumar के द्वारा
April 29, 2012

आपने सवालों के माध्यम से वाकई दुनिया को प्रेम और सौहार्द की डोर में बांधने की कोशिश की है ……….. आप भविष्य में ऐक उत्कृष्ट समाज सुधारक के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त करेंगे ……………………… कृपया हमारी नई रचना पर भी प्रकाश डालें …….

    RAHUL YADAV के द्वारा
    April 29, 2012

    मयंक जी , आपका बहुत धन्यवाद अगर समाज में मेरी आवश्यकता है तो मै सदैव उसके लिए तत्पर हूं पर इस प्रसिद्वि सेे बहुत डर लगता है यह मुझको कतई नहीं चाहिये।

चन्दन राय के द्वारा
April 29, 2012

Dear आपकी रचना वाकई अच्छी होती है., pls. spread this painful incident , which i have posted today in my blog for a noble cause, i will be grateful to you for this humanity

    RAHUL YADAV के द्वारा
    April 29, 2012

    धन्यवाद चंदन जी

Jayprakash Mishra के द्वारा
April 29, 2012

 राहुल जी नमन, मन के भावों को अपनी भाषा में लिखना अच्छा लगा.

    RAHUL YADAV के द्वारा
    April 29, 2012

    जयप्रकाश जी आपका धन्यवाद

April 29, 2012

भैया ब्बत तो सही कर रहे हैं आप……शायद आपके अन्दर उठाने वाले जज्बातों का लिंक मेरे ब्लाग से मिल जाये….. http://merisada.jagranjunction.com/2012/04/24/%E0%A4%88%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%AC-%E0%A4%9C%E0%A4%97-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%BE-%E0%A5%A7/#comment-818

    RAHUL YADAV के द्वारा
    April 29, 2012

    अलीन जी प्रणाम मै तो एक साधारण सा मानव हूँ इतनी जटिल चीजे जल्दी नहीं समझ पाता । ईश्वर को एक सकारात्मक रूप मंे स्वीकार करता हूँ , किसी चीज की उससे इच्छा नहीं रखता हूं क्योंकि हर पल वह हमारे साथ है और जो भी करता है वह हमारे अच्छे के लिए करता है।…………रचना से परिचित कराने के लिए आपका आभार……….धन्यवाद

ajaydubeydeoria के द्वारा
April 28, 2012

बहुते सुन्दर गीत ह भईया, बहुते सुन्दर तोहरे जज्बात हैं हम कैसे बतलायीं बबुआ, ई कईसन बात है……. आजु के इहे रीति ह, आजु के इहे राग है…….

    RAHUL YADAV के द्वारा
    April 28, 2012

    अजय सर नमस्कार वास्तविक अर्थों में तो आपने इस कविता को पूरा किया है उस पूरब की माटी को प्रणाम और आपका धन्यवाद


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